नाम लिया जब तेरा किसी ने,
लम्हों का फिर ख्याल सा आया हमें
जब साथ मिलकर, करते थे घंटों बातें
आज आवाज सुनने को मन तरसता है,
हंसी सजाने का वादा किया था,
आज क्यों तुमने फिर रूलाया हमें,
यादों के सहारे हम तो काट लेते,
जीवन का हर पल खुशी के साथ,
मेरी आंखों में बसे उन सपनों से,
आज फिर तुमने क्यों उठाया हमें,
Sunday, September 7, 2008
ख्याल
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4 comments:
अच्छा लिखा है।
वाह जी वाह रजनी जी बहुत अच्छा लिखते हो लिखते रहो
सुंदर अभिव्यक्ति
अब और क्या कहें ............
वीनस केसरी
बहुत सुन्दर.
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