Tuesday, August 19, 2008

कुदरत


वो वादियां, वो चारों तरफ की हरियाली,

सुनहरी किरणों की आसमान पर छाई लाली,

कभी आसमान से टपकता पानी,

झरनों की वो सुंदर कहानी,

पंछियों के चहकने का नजारा,

देख लगता सबकुछ कितना प्यारा,

जमकर बरसे मेघा तो मस्ती सी छाई,

सतरंगी पींघ भी आसमान पर नजर आई,

पेड़ों के हरे पत्तों पर टपकती बूंद ऐसे,

नहा कर निकली हो वो पानी से जैसे,

1 comment:

रंजन राजन said...

अच्छा लिखा है। लगातार लिखते रहें।